मनुष्य अपनी सारी संपत्ति अपनी अगली पीढ़ी के लिए छोड़ जाता है।
तुम्हे लगता है यह उसका परिवार के प्रति प्रेम और त्याग है, ऐसा नही है, इसके पीछे उसकी गहरी मजबूरी छिपी है।
मनुष्य संपत्ति इसलिए नहीं छोड़ता क्योंकि उसे अपनी अगली पीड़ी से प्रेम है, बल्कि इसलिए छोड़ता है क्योंकि उसके पास उसे अपने साथ ले जाने का कोई विकल्प नहीं है।
मृत्यु के बाद यदि यह व्यवस्था होती कि तुम्हारी धन संपत्ति भी तुम्हारे साथ जा सकती है और अगले जीवन में तुम्हारे काम आ सकती है, तो कोई भी मनुष्य अपनी अगली पीढ़ी के लिए धन संपत्ति नही छोड़ता।
क्योंकि मनुष्य स्वभावतः सबसे पहले अपने हित को देखता है।
यही मनुष्य का मूल स्वभाव है।
जहाँ अपने हित और दूसरे के हित में चुनाव करना हो, वहाँ मनुष्य सबसे पहले अपना हित देखता है।